हम और तुम
छोटी सी थी , जब तुम्हारी हथेलियों में समा गयी थी। वह पहला ऐसा पल था, जब तुम रोता देख खुश थे।
हाथ थाम मेरा सिखाया , तुमने।
घोडा बन पुरे घर की सैर करायी , तुमने।
हवा में उछाल मुझे खिलाया , तुमने।
नींद ना आने पर चंदा मामा वाली लोरिया सुनाई , तुमने। तभी तो पता चला मुझे के चंदा मेरे मामा है।
लल्ला - लल्ला लोरी गा झूला झुलाया, तुमने।
काँधे पर बिठा भाई की शादी में भांगड़ा कराया , तुमने।
ज़िन्दगी का पहला डांस सिखाया , तुमने।
हर मोड़ पर साथ दिया मेरा , तुमने।
हर मुश्किल , हर परेशानी में ढाल बन , खड़े हुए तुम।
हर ख़ुशी बाटी मेरे साथ, तुमने।
मेरे नाज़ नखरे उठाये , तुमने।
दुनिया की गन्दगी से बचाया , तुमने।
फिर मुझे आज यूँ , क्यों जाने दे रहे हो ? मुझे रोकोगे तक नहीं ? आज तुम्हारी आँखों की ख़ुशी , दुःख बन कर क्यों निकल रही है ? आज के दिन का तो बेसब्री से इंतज़ार था न तुम्हे ? फिर ये आंसू क्यों ?
देखो न तुम्हारा दिया हुआ मांग टीका पहना है मैंने आज , और बिंदिया भी लगायी है मैंने लाल। गले में वह तुम्हारा दिया हुआ हीरो का हार भी है। देखो न मेरे हाथों की मेहँदी , आज पहली बार इतनी गाढ़ी रची है। अरे , मेरे पैरो की बिछिया देखि तुमने ? प्यारी है न ? तुम्हे पता है, तुम्हारी दी हुई पायल मैंने अभी तक पहनी है। तुम्ही ने कहा था न की इस लाल जोड़े में मैं बेहद खूबसूरत लग रही हूँ , जितना कभी नहीं लगी। फिर मुझे देखते ही रोये क्यों ? इन्हे ख़ुशी के आंसू कहुँ या गम के समझ ही नहीं आता।
कितनी अजीब घडी है न यह ? जब एक दूसरे के साथ बिताया हर लम्हा आँखों के सामने से गुज़र जाता है , कितना भी चाहे पर हम उसे रोक नहीं पाते। नाराज़ हो जाती थी मैं तुमसे , जब भी कहते थे के मैं छोड़ के चली जोगी तुम्हे , उस पल तो रुलाते थे पर मेरे आंसू पोछने भी तो तुम ही आते थे। आज समझ आया के ऐसा क्यों कहते थे तुम , पर आज मेरे आसु पोछने क्यों नहीं आ रहे ? क्यों सबसे मुह छुपाये बैठे हो ? सब जानते है के तुम मुझसे कितना प्यार करते हो। कितना भी दिखा लो तुम ऊपर से , कि तुम नहीं रोते , तुम्हारी आँखे सब सच बोल रही है आज। नाराज़ हूँ तुमसे मैं , मुझे जाते देख एक बार भी रोक नहीं न , जाने दिया न मुझे। सब तुम्हारी गलती है , इतना दूर जो भेज रहे हो मुझे। सब तुम्हारी गलती है , आखिर क्यों दिया इतना प्यार मुझे?
" ले बाबुल , आज उड़ चली यह चिड़िया तेरे आंगन से।
सूना कर गयी तेरा आंगन, जहा उड़ती फिरती थी ये।
खेल-कूद जहा मचाती थी ये,आज उसी को छोड़ जा रही है।
अब न सुनाई देगी वह चहचहाने की आवाज़ ,
जा रही है आज तुझे छोड़ के … "
